अगर अब भी आपकी नींद नहीं खुली तो याद रखिये अगली बारी आपकी है
- दुष्कर्म की घटनाओं पर चुप्पी कब तक
- क्यों आंदोलन के नाम पर हो रही खानापूर्ति
- आखिर कब बेखौफ हो सकेगी आधी आबादी
- यौन उत्पीड़न के दोषी कहीं हम ही तो नहीं
- पीड़िताओं का साथ देने की हिम्मत क्यों नहीं
कठुआ, अलीगढ़, हैदराबाद,
रांची, समस्तीपुर, बक्सर, उन्नाव, बुलंदशहर और दरभंगा। निर्भया को इंसाफ दिलाने के
लिए 7 साल से इंतज़ार हो रहा है। कठुआ की आसिफा आज भी रो रही होगी। अलीगढ़ की ढाई
साल की मासूम ट्विंकल की तो याद कर ही दिल रो पड़ता है। मासूमों के साथ अत्याचार
की इंतहा की गयी। आसिफा को नशे की दवा देकर न जाने कितनी बार बलात्कार किया गया। जब
उसकी हत्या करने गये, तो पुलिस ने हत्या से पहले उसके जिस्म को नोंचा। अलीगढ़ की ढाई
साल की ट्विंकल। वो तो ठीक से बोलना भी नहीं सीख पायी थी अभी। उसके साथ गलत कर
उसके हाथ को शरीर से उखाड़ दिया। उसके पेट को चाकू से चीर दिया। कितना दर्द हो रहा
होगा। ऐसा नहीं है कि मरने के बाद ही दर्द होता है। यह दर्द मैं भी महसूस करता
हूं। पता नहीं आप कर पाते हैं या नहीं। हैदराबाद में मदद के नाम पर अकेली लड़की से
गैंगरेप कर जिंदा जलाना। उन्नाव में कोर्ट में बयान दर्ज करने जा रही गैंगरेप पीड़िता
को जिंदा जला देना। वो भी तब जब सभी आरोपी कोर्ट से जमानत पर छूटे ही थे। समस्तीपुर
और दरभंगा में वैसे मासूमों के साथ दुष्कर्म, जिसे तो बलात्कार का मतलब भी नहीं
पता। बक्सर में भी जिंदा जला देना तो बुलंदशहर में गैंगरेप के बाद वीडियो वायरल,
और ये करने वाले अपने ही दूर के रिश्तेदार निकले। कुछ दिनों पहले ही तो नालंदा में
एक बच्ची अपने दोस्त के साथ पहाड़ी पर घूमने जाती है तो स्थानीय युवक न सिर्फ उसके
साथ गैंगरेप करते हैं, बल्कि उसका वीडियो बनाने की भी हिमाकत करते हैं। कैमूर में चलती
गाड़ी में गैंगरेप किया जाता है। छी।
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अब तो कलम की स्याही भी खत्म होने लगी है इस
घिनौनी वारदात की फेहरिश्तों को याद करने में। एक का मामला चलता ही रहता है, तब तक
दूसरी वारदात सामने आ जाती है। खून एक बार फिर खौलने लगता है। लेकिन कब तक यूं ही
खून खौलता रहेगा। हैदराबाद में सभी दोषियों का इनकाउंटर सही है या गलत यह पता
नहीं। लेकिन इतना तय है कि उसने मन को थोड़ा सुकून ज़रुर दिया। क्या यह कहना गलत
है आज इस देश में कानून और न्याय व्यवस्था से लोगों का विश्वास खत्म होता जा रहा
है। जज यह जानते हुए भी कि सामने कटघरे में खड़ा शख्स दोषी है, बरी करने को मजबूर हो
जाते हैं, क्योंकि कानून को सबूत चाहिए। दुष्कर्म करना, गैंगरेप, वीडियो बनाना,
वायरल करना। ये जब भी हुआ है, तो लोग सड़कों पर आंदोलन करने उतर जाते हैं।
मोमबत्तियों का बाज़ार सज जाता है। पीड़िता से सवाल पूछे जाते हैं- घटना कैसे हुई,
कितने लोगों ने किया, क्या-क्या किया, क्या सभी लोगों ने किया, क्या किसी ने मुंह
बंद कर रखा था। लेकिन इस घिनौने वारदात के बाद जिंदा बच जाने वाली बेटियों का दर्द
किसी ने महसूस किया है। क्या इस दर्द को वाकई किसी ने महसूस करने की कोशिश किसी ने
की है। इसके बाद अगली बारी न जाने कहां, कब और किसकी। हो सकता है अगली बारी किसी
अपने की हो।
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वैसे भी यौन उत्पीड़न की शिकार युवतियों को इसी समाज में घृणित दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन कभी सोचा है आपने, कि उनके साथ हुई इस घटना में उनकी क्या गलती है। गलती जिसने की, सज़ा उसे मिलनी चाहिए या नहीं। तो उसे सज़ा क्यों जो खुद दूसरे के गुनाहों का दर्द झेल रही। क्या यह ज़रुरी नहीं, कि ऐसे लोगों के साथ आया जाये, क्या यह जरुरी नहीं ऐसे लोगों को यह अहसास कराया जाये, कि जितनी अहमियत पहले थी उससे कम अहमियत अब भी नहीं। क्या यह नहीं किया जाये, कि लोग उसका साथ देने पहले से ज़्यादा की संख्या में आगे आयें। आज भी इस देश में जब दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न या गैंगरेप जैसी घटनाएं मीडिया में आती हैं, तो लोग उसे बड़े चाव से देखते हैं। एक तरफ घटना की निंदा होती है, वहीं दूसरी तरफ पॉर्न साइट पर वीडियो ढूंढा जाता है। कहां जा रहे हैं हम। किस ओर जा रहा है हमारा देश।
गुस्सा आता है आपको या नहीं। मुझे तो बहुत आता है। समझ नहीं आता इस
गुस्से का इजहार कैसे करूं। और क्या वाकई कोई फायदा होगा भी या नहीं। ये जो जितने
भी जिस्म के भेड़िये हैं न, ये सभी इस समाज पर कलंक हैं। ज़्यादा नहीं कहूंगा,
क्योंकि गुस्सा बहुत है मेरे भीतर। सिर्फ एक बात कहूंगा, हत्या की बात छोड़ दीजिये
साहब, बस ये जो यौन शोषण और दुष्कर्म करने वाले लोग भी जो हैं न वो कभी आपके अपने
नहीं हो सकते। दरअसल ये वैसे लोग हैं, जिनकी कोई बहन, मां, भाभी, बेटी, पत्नी, भगनी,
या भतीजी हो ही नहीं सकती, क्योंकि ये लड़कियों या महिलाओं को सिर्फ एक जिस्म के
नजरिये से देखते हैं। जो एक मर्द के हवस की प्यास बुझा सकता है। तो सावधान रहें ऐसे
लोगों से। और हां एक बात ज़रूर याद रखें, कि अगर कोई किसी को अपना मानता है, तो वो
उसके साथ कभी गलत कर ही नहीं सकता। सावधान रहें, सुरक्षित रहें। और अपने घर की
महिलाओं, दोस्तों और बच्चों को भी ऐसे लोगों से बचकर रहने को कहें। वरना कौन जानता
कि कल आपकी बारी हो।
वेद प्रकाश
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