यौन उत्पीड़न का दोषी कौन

यौन उत्पीड़न का दोषी कौन

जो कल तक घर के बाहर हुआ करता था, वो अब घरों की दहलीज़ के भीतर कदम रख चुका है। ज़्यादातर मामलों में बलात्कारी या यौन शोषण के मामले में दोषी अपने ही होते हैं। या तो वे आपके रिश्तेदार होते हैं, या फिर कोई जान-पहचान वाला। आप जिनपर भरोसा करते हैं, वे न सिर्फ आपके भरोसे को तोड़ते हैं, बल्कि अपनी यौन कुंठा को शांत करने के लिए एक की ज़िंदगी भी खराब कर रहे होते हैं। और उस एक की ज़िंदगी से जुड़े होते हैं आप स्वयं, और आपका परिवार। ऐसा नहीं कि यौन शोषण की शिकार सिर्फ लड़कियां ही होती हैं, छोटे बच्चे भी इसका शिकार होते हैं। एक बच्ची जो पांचवी कक्षा में पढ़ती थी, उसके घर एक व्यक्ति का आना जाना था। वो बच्ची से बहुत प्यार करता था। कभी उसे चॉकलेट खिलाता, कभी उसे गोद में बिठाता, तो कभी उसे चुंबन करता। सातवीं कक्षा तक जाते-जाते वो उस बच्ची के वक्षस्थलों पर हाथ फेरना शुरु कर चुका है। बच्चों का मन कोमल होता है, उन्हें गलत सही का अहसास नहीं होता। और जब तक होता है, तब तक देर हो चुकी होती है। एक छठी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र के घर उसके दूर के कोई रिश्तेदार पहुंचे। जगह की कमी की वजह से रात में सोने की व्यवस्था दोनों की साथ ही कर दी गयी। लेकिन सुबह से उस बच्चे का रवैया बदल गया। कई दिनों तक बेहद गुमसुम रहने के बाद जब मां-बाप ने संज्ञान लिया, तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ। सोचिये उस बच्चे या बच्चियों पर क्या बीतती होगी, जो अपनों पर भरोसा करते हैं, और वे ही उनका उत्पीड़न करते हैं। ज़रुरत ये है, कि मां-बाप अपने बच्चों के साथ वक्त बितायें। उनकी हर बात सुनें। स्कूल या कॉलेज या ऑफिस में वक्त कैसा बीता, यह जानना भी ज़रुरी है। इसके लिए आपको एक दोस्त बनना होगा, न कि मां-बाप। लेकिन क्या ये संभव है आज के समय में। ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सअप और फेसबुक जैसे सोशल साइट्स ने लोगों को ज़्यादा व्यस्त कर दिया है। लेकिन गंभीर सवाल यह कि आपकी ऐसी व्यस्तता किस काम की, जब आपके बच्चे आपसे दूर होते जा रहे हैं।
वेद प्रकाश

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