सकारात्मक रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।
अगर घर में सभी को एक साथ दस्त लग जाये तो सभी के लिए अलग-अलग टॉयलेट नहीं होते, बल्कि सभी सदस्य बिना हल्ला किए समझदारी से निपट लेते हैं, और पड़ोसियों को पता भी नहीं चलता... ठीक वैसे ही किसी भी घर में अमूमन 5-6 लोगों के चाय के लिए दूध की व्यवस्था होती है, लेकिन अगर 40-50 लोग एक साथ आ जायें तो चाय की किल्लत होना स्वाभाविक है। ऐसे में यह कहना गलत है कि घर में गरीबी है, दूध की व्यवस्था नहीं रहने से प्रबंधन फेल है। यही हाल अस्पताल, ऑक्सीजन, दवाओं का भी है। सब पर्याप्त मात्रा में थे, लेकिन उम्मीद से कई गुणा ज़्यादा मरीज आ जाने से परिस्थिति का गंभीर होना लाजिमी है। कब और किस क्षण क्या होगा इसका अंदाज़ा दुनियाभर के वैज्ञानिक भी नहीं लगा पा रहे। कभी कोरोना, कभी ब्लैक फंगस तो अब व्हाइट फंगस... हर रोज दुनियाभर में लाखों लोग मर रहे हैं... दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहां धार्मिक स्थलों से ज़्यादा अस्पताल हैं, लेकिन वहां का हाल और मौत के आंकड़ों पर नज़र डालेंगे तो हमारा सारा ज्ञान सिमट कर रह जाएगा। जनसंख्या के मामलों में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है... 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में दुनिया की कुल आबादी के 17.7 फीसदी लोग यहां रहते हैं... देश में कोरोना से 19 मई 2021 तक करीब 2.87 लाख लोगों की मौत हुई... वहीं विश्वगुरू अमेरिका की आबादी 33 करोड़ और कोरोना से मौत करीब 5.5 लाख, ब्राजील की आबादी 21 करोड़ और कोरोना से मौत करीब 3 लाख, यूनाइटेड किंगडम की आबादी 6.7 करोड़ और कोरोना से मौत 1.3 लाख, रूस की आबादी 14 करोड़ और कोरोना से मौत करीब 1 लाख, इटली की आबादी 6 करोड़ और मौतें 1.1 लाख, स्पेन की आबादी 4.6 करोड़ और मौतें करीब 75 हज़ार... जनसंख्या कम हो और देश संपन्न हो तो संसाधनों की कमी नहीं रहती है... ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बेतहाशा बढ़ती आबादी और शुरुआत के दिनों में लापरवाही की वजह से कोरोना के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई... कुछ लापरवाही सरकारी तंत्र से हुई तो उससे कहीं ज़्यादा हमने की... दुनिया के सभी देश कोरोना से निपटने के लिए बेहतर काम कर रहे... हमारे देश में भी बेहतर काम हो रहा, चाहे वो केन्द्र की सरकार हो, या बिहार, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य की सरकार... सभी अपने स्तर से बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं... इस विकट घड़ी में कई स्वयंसेवी संस्था के अलावा लोग निजी तौर पर लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं...
एक छोटा सा वाक्या- हमारे एक मित्र संजय परीदा की तबियत बेहद खराब है, उसे कोरोना नहीं लेकिन दूसरी गंभीर बीमारी हो गई... मदद के लिए कई मित्रों ने सोशल मीडिया के जरिये गुजारिश की... लोग आगे आये और अपनी क्षमता के हिसाब से मदद भी की... मदद करने वालों में कई ऐसे हैं जो संजय को जानते तक नहीं, वे बस इतना जानते हैं कि इंसानियत के नाते मदद करने से बेहतर कुछ भी नहीं... उत्तम, संजय, विभा, रंजीत, अभिजीत, नैंसी, दीपक, रंजन, हर्ष, निकिता, राजीव और कई नाम उनमें शामिल हैं... वहीं उसके साथ काम कर चुके लोग भी बढ़चढ़ आगे आये... रेयाज, सौरभ, आत्रेयी, दीपिका सिन्हा जी, विजयवर्धन, अनिता, चंद्रशेखर सिंह, समीर रंजन जी, अनुराग, कीर्ति, रेखा, समीर, रंजीत, दिनेश के अलावा और भी कई लोग... हम सभी मदद के बदले कुछ उम्मीद नहीं रखते, बल्कि हमलोग बस अपने एक साथी को ठीक होते देखना चाहते हैं...
ऐसे में ज़रूरी है कि सबलोग अपनी जिम्मेदारी निभाईये, सरकार के साथ-साथ मुश्किल में पड़े लोगों का भी साथ दें... व्यवस्था पर उंगली उठाने से बेहतर है कि उसे ठीक करने में हमारी जो अपेक्षित भूमिका है, उसका निर्वहन करें... अंत में गुजारिश है कि ज़रूरतमंदों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाते रहिये, भरोसा रखिये आने वाला कल सुनहरा ज़रूर होगा। सकारात्मक रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।
❤️🙏🏻❤️
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